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झारखण्ड में 33 कोषागार (नई दिल्ली स्थित झारखण्ड भवन के कोषागार सहित जिलास्तर पर 271 कोषागार और अनुमंडलीय स्तर पर छः2 उप-कोषागार) राज्य सरकार की ओर से धन प्राप्ति और भुगतान के दैनिक संव्यवहारों को संभालने और कोषागार संहिता और वित्तीय नियमावली के अनुसार उनके अभिलेखों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं। वे मासिक लेखें और विवरणीयों3 को संकलित कर महालेखाकार4 (एजी) को प्रस्तुत करते हैं।
राज्य सरकार के आईटी विजन और आईटी योजना को ध्यान में रखते हुए, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीओआईटी), झारखण्ड सरकार द्वारा झारखण्ड में कोषागारों के कम्प्यूटरीकरण के लिए "परियोजना प्रतिवेदन और कार्य योजना" तैयार की गई (सितंबर 2003)। तदनुसार, ई-गवर्नेंस परियोजना के तहत् राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र
(एनआईसी), झारखण्ड राज्य इकाई के सहयोग से डीओआईटी द्वारा कोषागार कम्प्यूटरीकरण परियोजना शुरू की गई (फरवरी 2004)।
जून 2007 में, वित्त विभाग, झारखण्ड सरकार ने डेटा की एकरूपता, विभिन्न प्रणालियो 5 के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान और कोषागारों के पूर्ण स्वचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोषागार, पेंशन, लेखापरीक्षा और विभाग के अन्य कार्यों के स्वचालन हेतु एक वेब आधारित कोषागार सूचना प्रणाली (टीआईएस) 'कुबेर' को कार्यान्वित किया। प्रणाली का विकास विगत कई वर्षों (2007 और 2012 के बीच) में विभिन्न मॉड्यूलों को जोड़ते हुए हुआ, यथा- 2007 में कोषागार एमआईएस मॉड्यूल, 2008 में डीडीओ विपत्र तैयारी एप्लिकेशन, 2010 में ऑनलाइन जीपीएफ लेखांकन एवं निधि तैयारी मॉड्यूल और 2012 में निधि मॉड्यूल। विभिन्न हितधारकों (जैसे; परिवहन विभाग (वाहन और सारथी), राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग आदि) के साथ, इस अवधि के दौरान प्रणाली के इंटरफेस को बढ़ाया गया।