नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के लेखापरीक्षा प्रतिवेदन  की कंडिका 205  से 215  के सम्बन्ध में  लेखापरीक्षा एवं लेखा पर विनियमन- भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक 2007  के अध्याय 15  में सम्बंधित प्रावधान किये गए हैं , जो कि निचे प्रस्तुत किये गए हैं –

205. लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का प्रारूप, अन्तर्वस्तु तथा प्रस्तुतीकरण का समय नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा निश्चित किया जाना|

लेखापरीक्षा प्रतिवेदन का प्रारूप, अन्तर्वस्तु तथा प्रस्तुतीकरण का समय नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा निश्चित किया जाएगा।

206. लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में कोई मामला शामिल करने से पूर्व सरकार को अवसर प्रदान करना

लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में कोई मामला शामिल करने से पूर्व अपनी टिप्पणियाॅं, अवलोकन तथा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए सरकार को पर्याप्त अवसर दिया जाएगा।

207. सरकार को ड्राफ्ट   की सूचना तथा उस पर चर्चा

1. पत्र की तारीख से छः सप्ताह की अवधि के भीतर या ऐसी अन्य समय अवधि, जो निर्दिष्ट की जाए, के भीतर सरकार की टिप्पणियां, अवलोकन और स्पष्टीकरण सूचित करने के लिए सरकार के सम्बन्धित सचिव को नाम से, महालेखाकार (लेखापरीक्षा), ड्राफ्ट   पैराग्राफ के रूप् में प्रस्तावित लेखापरीक्षा अभ्युक्तियों को एक प्रति भेजेंगे। महालेखाकार (लेखापरीक्षा) उक्त अवधि के भीतर परस्पर सुविधा से सचिव के साथ ड्राफ्ट   पैराग्राफ पर चर्चा का प्रस्ताव भी करेंगे। ड्राफ्ट   निष्पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन के मामले में चर्चा आवश्यक नहीं है क्योंकि इस पर इन विनियमों के अनुसार एक्जिट कान्फ्रेंस में सचिव के साथ अलग से चर्चा की जाती है।

2. महालेखाकार (लेखापरीक्षा) सरकार के वित्त मंत्रालय या वित्त विभाग के सचिव के नाम से ड्राफ्ट   पैराग्राफ की एक प्रति साथ-साथ भेजेंगे।

3. ड्राफ्ट   पैराग्राफ की अभ्युक्तियां लेखापरीक्षा साक्ष्य द्वारा समर्थित होंगी। महालेखाकार (लेखापरीक्षा) अपने पास उपलब्ध किसी सुसंगत दस्तावेज तथा साक्ष्य की प्रतियां, जिनकी सरकारी विभाग द्वारा अपेक्षा की जाए, मुहैया कराएंगे।

208. सरकार द्वारा ड्राफ्ट   पैराग्राफ का उत्तर

1.  सरकार के संबंधित विभाग का सचिव, (क) महालेखाकार (लेखापरीक्षा) को ड्राफ्ट   पैराग्राफ, जैसे ही यह प्राप्त होता है, की प्राप्ति की पुष्टि करेगा या पुष्टि कराएगा, तथा (ख) निर्धारित अवधि के भीतर महालेखाकार (लेखापरीक्षा) को नाम से और लिखित में ड्राफ्ट   पैराग्राफ पर सरकार की टिप्प्णियां, अभ्युक्तियां और स्पष्टीकरण सूचित करेगा। उत्तर सचिव द्वारा हस्ताक्षरित होगा या सचिव द्वारा अनुमोदन का उस पर संकेत होगा।

2. सरकार के सचिव के उत्तर में निम्नलिखित बातें होगीः-

(क) क्या ड्राफ्ट   पैराग्राफ में उल्लिखित तथ्यों तथा आंकडों को विभाग स्वीकार करता हैं, यदि नही ंतो विधिवत प्रमाणित सुसंगत दस्तावेजों और साक्ष्य द्वारा यथा समर्थित कारण;

(ख) ड्राफ्ट   पैराग्राफ में शामिल मामलों पर सरकार की टिप्पणियां, अभ्युक्तियां और स्पष्टीकरण;

(ग) ड्राफ्ट   पैराग्राफ में दिए गए सुझावों और सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया;

(घ) की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित उपचारी कार्रवाही; तथा

(ड) विभाग की कोई अन्य अभ्युक्तियां अथवा टिप्पणियां।

3. लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की तैयारी, अन्तिम रूप देने और विधान मण्डल में प्रस्तुत करने की समयसूची के सुसंगत महालेखाकार (लेखापरीक्षा) ड्राफ्ट   पैराग्राफ का उत्तर भेजने के लिए समय वृद्धि के लिए सरकार के सम्बन्धित सचिव द्वारा किए गए अनुरोध पर विचार कर सकते हैं। प्रत्येक ऐसे अनुरोध में (ं।) निर्धारित समय के आगे समयवृद्धि मांगने के कारणों का स्पष्ट रूप से उल्लेख होगा, और (।।) महालोखाकार (लेखापरीक्षा) को निश्चित तारीख, जिस तक ड्राफ्ट   पैराग्राफ का अन्तिम उत्तर भेजा जाएगा, बतायी जाएगी।

4. महालेखाकार (लेखापरीक्षा), यदि निर्धारित अवधि या सहमत समय वृद्धि के भीतर अन्तिम उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है, इस पूर्वानुमान पर आगे बढेंगे कि मामले में सरकार की कोई टिप्पणी, अभ्युक्ति तथा स्पष्टीकरण नहीं है। ऐसे मामलों में ड्राफ्ट   पैराग्राफ में उल्लिखित तथ्य, आंकडे तथा संबंधित लेखापरीक्षा साक्ष्य की यथार्थता के लिए विभाग उत्तरदायी होगा।

5. महालेखाकार (लेखापरीक्षा) द्वारा सरकार के उत्तर पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। ड्राफ्ट   पैराग्राफ उत्तर को देखते हुए लेखापरीक्षा प्रतिवेदन आशोधित किया जा सकता है अथवा निपटाया जा सकता है या उसे लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल नहीं किए जाने का निर्णय लिया जा सकता है।

209. लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल करने के लिए अन्तिम रूप दिए गए पैराग्राफों की सूचना

राज्य सरकार या संघ राज्य क्षेत्र सरकार के मामले में महालेखाकार (लेखापरीक्षा) लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल करने के लिएस ड्राफ्ट   पैराग्राफ को अन्तिम रूप देने के बाद सम्बन्धित विभाग के सरकार के सचिव तथा वित्त विभाग के सचिव को नाम से अन्तिम रूप दिए गए पैराग्राफ की एक प्रति भेजेंगे। संघ सरकार के मामले में अन्तिम रूप दिए गए पैराग्राफ की

प्रतियां सम्बन्धित मंत्रालय के सचिव को भेजी जाएंगी।

210. विधान मण्डल के पटल पर रखने के लिए लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की प्रतियां भेजना

1. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, सरकार के सचिव, वित्त मंत्रालय या वित्त विभाग, जैसा मामला हो, को नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की प्रतियां भेजेंगे जो आगे की कार्रवाई और संसद या राज्य या संघ राज्य क्षेत्र विधान मण्डल में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल या प्रशासक को प्रस्तुत करने के लिए तत्काल कार्रवाई करंेगे। अधिनियम की धारा 19ए के अन्तर्गत लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की प्रतियां संबंधित मंत्रालय या विभग के सचिव अथवा विधानसभा वाले संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक को भेजी जाएगी जो उसे ससंद अथवा राज्य अथवा संघ राज्य क्षेत्र के विधान मण्डल में प्रस्तुत करने के लिए तत्काल कार्रवाई करंेगे

2. साथ ही लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की एक अहस्ताक्षरित प्रति राष्टपति या राज्यपाल या प्रशासक के सचिव को भेजी जाएगी।

211. प्रस्तुत करने के पश्चात् सरकार के सचिव को लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की प्रतियां भेजना

महालेखाकार (लेखापरीक्षा) संसद या विधान मण्डल, जैसा भी मामला हो, में प्रतिवेदन के प्रस्तुत हो जाने के बाद सम्बन्धित विभाग के सरकार के सचिव को लेखापरीक्षा प्रतिवेदन की प्रतियां भेजेंगे।

212. लोक लेखा समिति या लोक उपक्रम समिति को प्रस्तुत करने के लिए की-गई-कार्रवाई टिप्पणी तैयार करना

सरकार के सम्बन्धित विभाग के सचिव, अपने विभाग से सम्बन्धित उन लेखापरीक्षा पैराग्राफ (पैराग्राफ) जो लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल किए गयें हैं, पर स्वतः स्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणी लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति को प्रस्तुत करने के लिए तैयार कराएंगे। प्रत्येक मामले में स्वतः स्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणी पर सचिव का अनुमोदन होगा और यह बताया जाएगा किः

1. क्या ड्राफ्ट   लेखापरीक्षा पैराग्राफ पर महालेखाकार (लेखापरीक्षा) को लिखित उत्तर भेजा गया था और यदि नहीं तो ऐसा न किए जाने के कारण;

2. क्या लेखापरीक्षा पैराग्राफ में बताए गए तथ्य तथा आंकडे स्वीकार्य हैं और यदि नहीं तो जब ड्राफ्ट   पैराग्राफ सचिव द्वारा प्राप्त किया गया था, तब इसे न बताए जाने के कारण;

3. परिस्थितियां जिनमें हानि, विफलता, निष्फल व्यय आदि, जैसा कि लेखापरीक्षा पैराग्राफ में बताया गया, किस कारण से हुए (क) आन्तरिक नियंत्रक प्रणाली सहित वर्तमान प्रणाली में कमी, (ख) प्रणलियों तथा प्रक्रियाओं का अनुपालन करने में विफलता या (ग) पर्यवेक्षण स्तर के व्यक्तियों सहित व्यक्तियों की विफलता;

4. हानि, विफलता, निष्फल व्यय आदि के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (व्यक्तियों) पर उत्तरदायित्व निर्धारित करने के लिए की  गई कार्रवाई और सम्भावित समय सीमा जिसके अन्दर ऐसी कार्रवाई पूर्ण होने की आशा है;

5. लेखापरीक्षा पैराग्राफ में यथा उल्लिखित सरकार को प्राप्य किसी राशि की वसूली की वर्तमान स्थिति;

6. लेखापरीक्षा पैराग्राफ में दिए सुझावों और सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई;

7. ऐसे अन्य समान मामलों की समीक्षा के परिणाम और की-गई-कार्रवाई;

8. प्रणालियों को कारगर बनाने और प्रणाली की कमियों, यदि कोई हों, को दूर करने के लिए तथा भविष्य में ऐसे मामलों के घटित होने से बचने के लिए की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित उपचारी कार्रवाई; तथा

 

9. ऐसी अन्य सूचना जो लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति द्वारा निर्धारित की गई हो।

213. महालेखाकार (लेखापरीक्षा) द्वारा लोक लेखा समिति अथवा लोक उपक्रम समिति की सिफारिशों पर की -गई-कार्रवाई टिप्पणियों और उत्तरों की संवीक्षा

 

संघ, राज्यों तथा विधान सभा वाले संघ राज्य क्षेत्रों में जहां विधान समितियां अथवा सरकार यह चाहती है कि नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति की सिफारिशों पर सरकार की की-गई-कार्रवाई टिप्पणियों और उत्तरों की संवीक्षा करें, वहां निम्नलिखित प्रक्रिया लागू होगीः

 

1. सम्बन्धित विभाग के सरकार के सचिव, उचित रूप् से संदर्भित तथा संयोजित सुसंगत फाइलों तथा दस्तावेजों, जिन पर स्वतः स्पष्ट टिप्पणी तैयार की गई है, के साथ ड्राफ्ट   स्वतः स्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणी की दो प्रतियां महालेखाकार (लेखापरीक्षा) को संवीक्षा के लिए भेजेंगे। ऐसा समय अवधि के अन्दर किया जायगा, जैसा कि लोक सेवा समिति/लोक उपक्रम समिति द्वारा निर्धारित स्वतःस्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणियों के प्रस्तुतीकरण के लिए समय अनुसूची की आवश्यकताओं के सुसंगत पाया जाए।

 

2. महालेखाकार(लेखापरीक्षा) यथासम्भव शीघ्र, परन्तु एक माह के बाद नहीं, विधिवत संवीक्षित कर स्वतः स्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणी सचिव को वापस करेंगे। लोक लेखा समिति/ लोक उपक्रम समिति द्वारा निर्धारित की गई अपेक्षाओं के अध्यधीन महालेखाकार (लेखापरीक्षा) की संवीक्षित टिप्पणियों में आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव शामिल किए जा सकते है।

 

3. सचिव संवीक्षित टिप्पणी की प्रतियां की अपेक्षित संख्या, जैसा लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति द्वारा निर्धारित किया जाए, निर्धारित समय अनुसूची के अनुसार लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति के सचिवालय को भेजेंगे और वित्त मंत्रालय अथवा वित्त विभाग, जैसा भी मामला हो तथा महालेखाकार (लेखापरीक्षा ) प्रत्येक को एक-एक प्रति भी पृष्ठांकित करेंगे।

 

4. लोक लेखा समिति/ लोक उपक्रम समिति की सिफारिशों की प्राप्ति पर सचिव ऐसी अवधि के भीतर और ऐसे प्रपत्र में जिसे लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति निर्धारित करें, समिति को प्रस्तुतीकरण के लिए की-गई-कार्रवाई टिप्पणी के रूप में सरकार की प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए कार्रवाई आरम्भ करेंगे।

5. लोक लेखा समिति/लोक उपक्रम समिति की सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया उचित रूप से संदंर्भित तथा संयोजित सुसंगत फाइले तथा दस्तावेजों के साथ संबंधित समिति को प्रस्तुत करने से पूर्व संवीक्षा के लिए महालेखाकार (लेखापरीक्षा ) को भेजी जाएगी। महालेखाकार(लेखापरीक्षा ) की संवीक्षा टिप्पणियां, लोक लेखा समिति/ लोक उपक्रम समिति को भेजे जाने वाले प्रत्युत्तर में विधिवत प्रदर्शित की जाएंगी।

 

214. समय से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रणालियों तथा प्रक्रियाओं हेतु सरकार का कर्तव्य

 

सभी स्तरों पर अन्य बातों के साथ-साथ भूमिकाओं तथा उत्तरदायित्वों को स्पष्टतया परिभाषित करते हुए ऐसी पर्याप्त तथा विश्वसनीय प्रणलियों तथा प्रक्रियाओं की स्थापना तथा प्रवर्तित करना सरकार का कर्तव्य होगा जो यह सुनिश्चित करती हैं कि (।) ड्राफ्ट   पैराग्राफ के उत्तर (।।) लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में शामिल मामलों पर स्वतः स्पष्ट की-गई-कार्रवाई टिप्पणियां, और (।।।) लोक लेखा समिति/ लोक उपक्रम समिति की सिफारिशों पर की-गई-कार्रवाई टिप्पणियां प्रत्येक मामले में निर्धारित समय सीमा के अन्दर उचित अधिकारियों को भेजे जाते हैं।

215. सरकार को विलम्ब के मामले में सूचित करना

महालेखाकार (लेखापरीक्ष) संघ सरकार के मामले में सचिव (व्यय) वित्त मंत्रालय को तथा राज्य सरकार के मामले में मुख्य सचिव को और विधान मण्डल वाले संघ राज्य क्षेत्र के मामले में प्रशासक को विलम्ब के मामले में सूचित करेंगे। विलम्ब के मामलों पर भी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में उचित रूप से टिप्पणियां की जा सकती है।

 

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