आई.ए.एंड ए.डी. के लिए आचार संहिता

लेखापरीक्षा सिद्धांतों पर लीमा घोषणा के दिशानिर्देशों को नींव बनाते हुए सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन (इंटोसाई) ने आचार संहिता को निर्मित करना आवश्यक माना है जो कि सार्वजनिक क्षेत्र में लेखापरीक्षकों के लिए नैतिक महत्ता के मानक हैं। इंटोसाई आचार संहिता का उद्देश्य राष्ट्रीय आचार संहिता का निर्माण करना है जबकि प्रत्येक सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान (साई) का उत्तरदायित्व है कि वह सुनिश्चित करे कि उसके सभी लेखापरीक्षक राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक भाषाई एवं विधिक व सामाजिक परिस्थितियों में अंतर होने के कारण प्रत्येक साई का उत्तरदायित्व है कि वह अपनी आचार संहिता विकसित करें जो उसके स्वयं के परिवेश के लिए सर्वोत्तम हो।

इस परिप्रेक्ष्य में एवं अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियों के अनुरूप भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की संस्था हेतु आचार संहिता को अंगीकृत करने का निर्णय लिया गया। यह आचार संहिता भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्मित केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम (सीसीएस आचरण नियम) में सन्निहित मूल्यों एवं सिद्धांतों को समाविष्ट करती है और व्यावसायिक मानक समिति द्वारा जारी किए गए आईएसएसएआई 30 (सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानो हेतु इंटोसाई मानक) में सन्निहित बृहद् सिद्धांतों को अपनाती है।

अतः साई भारत के लिए आचार संहिता भारत के सिविल कर्मचारियों हेतु विहित सामान्य नैतिक आवश्यकताओं, जैसा कि सीसीएस आचरण नियम में वर्णित है एवं लेखापरीक्षकों के व्यावसायिक कर्तव्यों को सम्मिलित करते हुए, उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को समाविष्ट करती है।

उचित रूप से यह संहिता तब निर्मित की गई है जब भारत के सीएजी की संस्था अपने प्रारंभ से 150 वर्ष पूर्व कर चुकी है। सार्वजनिक क्षेत्र के लेखापरीक्षक की स्वतंत्रता, शक्तियों एवं उत्तरदायित्व भारत के सीएजी एवं उनके द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन हेतु नियुक्त किए गए कर्मचारियों से उच्च नैतिक मांग करते हैं जैसा कि भारतीय संविधान में वर्णित है। वस्तुतः आचार संहिता मूल्यों एवं सिद्धांतों की एव वृहत विवरणी है जो लेखापरीक्षकों के दैनिक कार्यों का मार्गदर्शन करती है। यह एक अच्छे माहौल के साथ ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा की संस्कृति निर्मित करती है। नैतिकता एवं ईमानदारी का पालन हर समय सुनिश्चित करने की आवश्यकता है एवं इसमें किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए।

साई भारत की आचार संहिता भारत के सीएजी, कार्यकारी अधिकारियों, व्यक्तिगत लेखापरीक्षकों एवं साई भारत के लिए अथवा उसकी ओर से कार्य करने वाले सभी व्यक्तियों पर लागू होती है। भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग में अथवा भारत में सीएजी की ओर से कार्यरत सभी व्यक्तियों का कर्तव्य है कि वे संहिता में निहित मूल्यों एवं सिद्धांतों से परिचित हों एवं तदनुसार कार्य करें। यह आचार संहिता अगस्त 2012 में निर्मित की गई थी।

 

आचार संहिता की सॉफ्ट कॉपी निम्न लिंक पर उपलब्ध है: आचार संहिता

Back to Top