हमारे बारे में
यह कार्यालय वर्ष 1967 से भारत के महालेखाकार, असम के एक शाखा कार्यालय के रूप में कार्य कर रहा था। 18 नवम्बर 1974 से यह एक स्वतंत्र कार्यालय के रूप में कार्य कर रहा है। पूर्व में यह “मालंच निवास” नामक एक किराये के भवन में स्थित था, जो त्रिपुरा के राजपरिवार तथा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर से अपने ऐतिहासिक संबंधों के लिए प्रसिद्ध है। नवम्बर 1989 में कार्यालय को अपने स्वयं के भवन में स्थानांतरित किया गया, जो कुंजबन, अगरतला में स्थित है।
वर्ष 1984 में कैडर के पुनर्गठन के पश्चात, लेखा परीक्षण (ऑडिट) से संबंधित कार्य महालेखाकार (लेखा परीक्षा), त्रिपुरा के कार्यालय को सौंपे गए तथा लेखा एवं अधिकार (Accounts & Entitlement) से संबंधित कार्य वरिष्ठ उप महालेखाकार (ए एंड ई), त्रिपुरा के कार्यालय को सौंपे गए। वर्ष 2011 में वरिष्ठ उप महालेखाकार (ए एंड ई), त्रिपुरा के कार्यालय को उन्नत कर महालेखाकार (ए एंड ई), त्रिपुरा का कार्यालय बनाया गया।

