जीपीएफ़
GPF / DLIS दावा (Claim) हेतु मार्गदर्शिका
आगामी पृष्ठों में सम्मिलित दिशानिर्देश समय-समय पर संशोधित “सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएँ) नियम, 1960” तथा “अखिल भारतीय सेवा (भविष्य निधि) नियम, 1955” (अखिल भारतीय सेवाओं—IAS, IPS एवं IFS—के मामलों में) द्वारा शासित हैं।
निधि का गठन (Constitution of the Fund)
पात्रता की शर्तें (Conditions of Eligibility)
एक वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण करने के बाद अस्थायी सरकारी कर्मचारी, पुनर्नियोजित पेंशनभोगी तथा स्थायी सरकारी कर्मचारी अनिवार्य रूप से GPF के अंशधारक होंगे। अस्थायी सरकारी कर्मचारी एक वर्ष की सेवा पूर्ण होने से पूर्व भी GPF की सदस्यता ले सकते हैं।
(सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएँ) नियम, 1960 के नियम 4 के अनुसार)
नामांकन (Nominations)
प्रत्येक अंशधारक को नियमों की प्रथम अनुसूची में निर्धारित प्रासंगिक प्रपत्र में नामांकन करना आवश्यक है। अंशधारक एक या अधिक परिवारजनों को नामित कर सकता/सकती है तथा एक से अधिक नामांकित व्यक्तियों की स्थिति में प्रत्येक के लिए देय हिस्से को निर्दिष्ट करेगा/करेगी।
परिवार की परिभाषा (Definition of Family)
GPF नामांकन के प्रयोजन हेतु ‘परिवार’ में पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे, अवयस्क भाई, अविवाहित बहनें, दिवंगत पुत्र की विधवा एवं बच्चे शामिल हैं; तथा यदि अंशधारक के माता-पिता जीवित न हों तो पितृ पक्ष के दादा-दादी।
यदि नामांकन के समय अंशधारक का कोई परिवार न हो, तो नामांकन पत्र में यह उल्लेख किया जाएगा कि भविष्य में परिवार प्राप्त होने की स्थिति में नामांकन अमान्य हो जाएगा।
नामांकन का निरस्तीकरण (Cancellation of Nomination)
अंशधारक द्वारा किया गया प्रत्येक वैध नामांकन अथवा निरस्तीकरण का नोटिस, लेखा अधिकारी या कार्यालयाध्यक्ष (जो भी लागू हो) को प्राप्त होने की तिथि से प्रभावी होगा।
नामांकन की समीक्षा (Review of Nominations)
यदि कोई नामांकित/प्रतिनिधि नामांकित व्यक्ति न हो, तो दिवंगत अंशधारक की GPF शेष राशि सक्षम दीवानी न्यायालय अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र/जीवन प्रमाण-पत्र के आधार पर दावेदार(ों) को प्रदान की जा सकती है।
अंशधारकों का खाता (Subscribers’ Account)
प्रत्येक कार्यालयाध्यक्ष, फॉर्म संख्या–3 में (दो प्रतियों में) मासिक विवरण महालेखाकार (A&E), त्रिपुरा को भेजेगा, जिसमें पिछले माह कार्यालय में नियुक्त हुए तथा GPF (केंद्रीय सेवाएँ) नियम, 1960 के अंतर्गत पात्र सभी सरकारी कर्मचारियों का विवरण होगा। प्रत्येक अंशधारक को महालेखाकार द्वारा विभाग सूचक ‘प्रिफिक्स’ सहित GPF खाता संख्या आवंटित की जाती है।
राज्य सरकार के आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) वेतन बिल एवं GPF वसूली अनुसूचियाँ तैयार कर उन्हें कोषागार अधिकारी/पे एवं लेखा अधिकारी को भेजते हैं। कोषागार अधिकारी लेन-देन पूर्ण होने पर दस्तावेज महालेखाकार कार्यालय को भेजता है, जहाँ प्रत्येक अंशधारक के खाते में प्रविष्टि की जाती है।
प्रत्येक अंशधारक के नाम खाता तैयार किया जाता है, जिसमें नियम 11 के अनुसार गणना किया गया ब्याज सहित अंशदान दर्शाया जाता है। इस कार्यालय में GPF खातों का संधारण पूर्णतः कंप्यूटरीकृत है; हालांकि अंतिम भुगतान प्रकरण अभी भी मैनुअल रूप से निपटाए जाते हैं।
अंशदान की शर्तें (Conditions of Subscription)
अंशधारक को मासिक अंशदान करना होगा, सिवाय निम्न अवधियों के—
-
निलंबन अवधि
-
सेवानिवृत्ति से पूर्व अंतिम तीन माह
-
डाइस-नॉन (Dies-non) मानी गई अवधि
-
ऐसा अवकाश जिसमें वेतन देय न हो अथवा अर्धवेतन/अर्ध औसत वेतन देय हो (विकल्पानुसार)
ब्याज (Interest)
राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर से GPF शेष राशि पर ब्याज देय होगा। त्रिपुरा में लागू GPF ब्याज दर नीचे दी गई तालिका के अनुसार होगी।
GPF पर ब्याज की दर (त्रिपुरा)
अग्रिम (Advances)
निधि से अग्रिम
उपयुक्त प्राधिकारी के विवेकाधिकार से, नियम 12 (GPF CS नियम, 1960) में उल्लिखित प्रयोजनों हेतु अस्थायी अग्रिम स्वीकृत किया जा सकता है।
स्वीकृति की शर्तें
-
नियम 12 के अनुसार लिखित स्वीकृति आदेश आवश्यक।
-
प्राधिकारी को यह संतुष्टि होनी चाहिए कि आवेदक की आर्थिक स्थिति अग्रिम को न्यायोचित ठहराती है तथा राशि निर्दिष्ट प्रयोजन हेतु ही व्यय होगी।
-
सामान्यतः अग्रिम राशि शेष जमा का 50% से अधिक नहीं होगी।
अग्रिम की वसूली
अग्रिम की वसूली समान मासिक किश्तों में की जाएगी, जो 12 से कम एवं 24 से अधिक नहीं होगी (जब तक अंशधारक अन्यथा न चुने)।
निकासी (Withdrawals)
निधि से निकासी
सेवा के 15 वर्ष पूर्ण होने के बाद (टूटी हुई सेवा अवधि सहित) सक्षम प्राधिकारी द्वारा निकासी स्वीकृत की जा सकती है।
निकासी की शर्तें
-
प्रत्येक छह माह में एक से अधिक बार नहीं (वर्ष में अधिकतम दो बार)।
-
एक ही प्रयोजन हेतु केवल एक बार।
-
राशि नियम 15 एवं 16 के अंतर्गत सीमित।
-
एक वित्तीय वर्ष में अस्थायी अग्रिम या आंशिक अंतिम निकासी—दोनों में से कोई एक—छह माह के अंतराल के साथ, ताकि वर्ष में अधिकतम दो निकासी हों।
निधि से अंतिम निकासी (Final Withdrawal)
अंतिम निकासी देय होगी—
-
सेवा त्याग पर
-
अधिवार्षिकी सेवानिवृत्ति पर
-
सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर
अंतिम निकासी हेतु आवेदन
सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व, अंशधारक/दावेदार द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन विभाग को दिया जाएगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी आवश्यक दस्तावेजों सहित महालेखाकार कार्यालय को अग्रेषित करेगा।
भुगतान की विधि (Manner of Payment)
लेखा अधिकारी, लेजर खाते से सत्यापन के बाद, अधिवार्षिकी सेवानिवृत्ति की तिथि से कम से कम एक माह पूर्व भुगतान प्राधिकरण जारी करेगा, जो सेवानिवृत्ति की तिथि को देय होगा।
यदि सरकारी सेवक सेवानिवृत्ति के पश्चात GPF राशि प्राप्त किए बिना मृत्यु को प्राप्त होता है, तो भुगतान नियमों के अनुसार नामांकित व्यक्ति(यों) को किया जाएगा। सेवा में मृत्यु की स्थिति में, नामांकन न होने पर, राशि नियमों के अनुसार परिवारजनों को दी जाएगी।

