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Jharkhand

प्रतिवेदन संख्या 1 वर्ष 2022 - 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष के लिए राज्य सार्वजनिक उद्यमों सहित सामान्‍य, सामाजिक, आर्थिक एवं राजस्व प्रक्षेत्रों का प्रतिवेदन

दिनांक जिस पर रिपोर्ट की गई है:
Thu 04 Aug, 2022
शासन को रिपोर्ट भेजने की तिथि
सरकार के प्रकार
राज्य
क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण,बिजली एवं ऊर्जा,परिवहन एवं इंफ्ररास्ट्राकचर,कर एवं शुल्क

अवलोकन

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का 31 मार्च 2020 को समाप्‍त हुए वर्ष के लिए झारखण्‍ड सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों सहित सामान्‍य, सामाजिक, आर्थिक एवं राजस्व प्रक्षेत्रों पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा के पटल पर दिनांक 04 अगस्त 2022 को रखा गया।
सामान्‍य, सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्र
2.1    दन्त चिकित्सा संस्थान, राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), राँची के लिए मशीनों, उपकरणों एवं उपस्करों के क्रय पर अनुपालन लेखापरीक्षा
दन्त चिकित्सा उपकरणों के क्रय हेतु ₹ 5.80 करोड़ के मूल प्रस्ताव, जैसा कि अधिशासी परिषद द्वारा अनुमोदित था, के विरुद्ध रिम्स निदेशक ने झारखण्ड सरकार को ₹ 9.29 करोड़ का विस्तृत बजट प्रस्तुत किया। हालांकि, रिम्स ने 2014-19 के दौरान ₹ 37.17 करोड़ मूल्य के दन्त चिकित्सा उपकरणों का क्रय किया, जो बजट का 400 प्रतिशत था।
जनवरी 2016 में आमंत्रित एक निविदा में, तकनीकी योग्यता एवं वित्तीय प्रस्ताव को भारांक देते हुए निविदा की शर्तों के अनुसार तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन बिना कोई कारण दर्ज किए संयुक्त भारांक प्रतिरूप पर नहीं किए गए। क्रय एवं तकनीकी समितियों ने किसी भी चरण में कोई भारांक दिए बिना तकनीकी अर्हता प्राप्त बोलीकर्ताओं के उद्धृत दरों में से न्यूनतम दर को अनुमोदित कर दिया। इस निविदा से  ₹ 18.52 करोड़ मूल्य के 20 उपकरण खरीदे गए।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बावजूद रिम्स निदेशक ने ₹ 5.40 करोड़ के बकाया विपत्र भुगतान के पूर्व, न तो आरोपी अभिकर्ता द्वारा प्रस्तुत अनुपालन की प्रति-जाँच की न ही समान प्रकार के उपकरणों के बाजार मूल्य अथवा अन्य संस्थानों द्वारा क्रयित क्रय मूल्य का सर्वेक्षण किया और आगे स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी लिए बिना ₹ 11.40 करोड़ मूल्य के उपकरण उसी आपूर्तीकर्ता से खरीद लिया।
निविदाओं का निर्णय वित्त एवं लेखा समिति ने नहीं किया, जबकि रिम्स विनियमों के तहत यह आवश्यक था। बल्कि विनियम में बिना किसी परिभाषित भूमिका वाली दो समितियों (क्रय समिति एवं तकनीकी समिति) को रिम्स द्वारा निविदा निर्णय का कार्य सौंपा गया।  
₹ 25.70 करोड़ मूल्य के मूल एवं उन्नत डेंटल चेयर, चलंत डेंटल वैन तथा 15 अन्य उपकरणों की खरीद के लिए एक बोलीकर्ता के पक्ष में तकनीकी अर्हता निर्णय में पक्षपात के अलावा बोलियों के तकनीकी मूल्यांकन में समानता एवं पारदर्शिता का अभाव था।
रिम्स ने दन्त चिकित्सा उपकरणों (चेयरों, चलंत डेंटल वैन तथा रेडियोविजियोग्राफी) पर, बजट अनुमानों में दिए दरों की तुलना में ₹ 14.25 का अपरिहार्य व्यय किया।    
मूल डेंटल चेयरों, उन्नत डेंटल चेयरों तथा चलंत डेंटल वैन के संलग्नक एवं अनुषंगी-यंत्र या तो गायब थे या निम्न विशिष्टताओं वाले थे। दस में से दो रेडियोविजिओग्राफी प्रणाली अन्य मॉडल के थे। रिम्स विलंबित आपूर्ति के लिए ₹ 2.37 करोड़ का जुर्माना लगाने में भी विफल रहा।   
दन्त चिकित्सा संस्थान को आपूर्ति किए गए ₹ 12.02 करोड़ मूल्य के उपकरण भंडार में दर्ज नहीं पाए गए थे और इस प्रकार इनके दुरुपयोग की आशंका थी।
प्रयोगशाला एवं शल्य-क्रिया कक्ष (ओटी) के लिए खरीदे गए (अगस्त 2016) ₹ 1.94 करोड़ मूल्य के उपकरण भंडारों में बेकार पड़े थे, क्योंकि प्रयोगशालाएँ एवं ओटी मई 2020 तक स्थापित नहीं हुई थीं। ओटी में उपयोग हेतु अगस्त 2016 में खरीदे गए ₹ 17.85 लाख के कीटाणुनाशक कालातीत हो गए थे।
राजस्व क्षेत्र
सामान्य 
वर्ष 2019-20 में झारखण्ड सरकार की कुल प्राप्तियाँ ₹ 58,417.14 करोड़ थी। राज्य सरकार ने कुल ₹ 25,521.43 करोड़ (कुल प्राप्तियों का 43.69 प्रतिशत) राजस्व सृजित किया। भारत सरकार से प्राप्तियों का हिस्सा ₹ 32,895.71 करोड़ (कुल प्राप्तियों का 56.31 प्रतिशत) जिसमें विभाज्य संघीय करों में राज्य का हिस्सा ₹ 20,593.04 करोड़ (कुल प्राप्तियों का 35.25 प्रतिशत) और सहायत अनुदान ₹ 12,302.67 करोड़ (कुल प्राप्तियों का 21.06 प्रतिशत) था। 2018-19 की तुलना में 2019-20 में राज्य सरकार द्वारा सृजित कर राजस्व में 13.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में गैर-कर राजस्व में 5.96 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बिक्री, व्यापार आदि पर कर, वाहनों पर कर, राज्य उत्पाद, भू-राजस्व और खनन प्राप्तियों का राजस्व बकाया राशि ₹ 12,179.30 करोड़ था, जिसमें से ₹ 2,898.27 करोड़ पाँच वर्षों से अधिक समय से बकाया था।
वाणिज्य कर विभाग
जीएसटी रिफन्ड पर लेखापरीक्षा
समुचित अधिकारियों ने निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया और 19 मामलों में रिफन्ड आवेदनों की अभिस्वीकृति, रिफन्ड आवेदन दाखिल करने के 15 दिनों की निर्धारित अवधि के उपरांत नौ से 246 दिनों के बीच के विलम्ब से जारी किए। इसके अलावा, 12 मामलों में अभिस्वीकृति आदिनांक जारी नहीं किए गए।
समुचित अधिकारियों ने निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया और 12 मामलों में प्रपत्र जी.एस.टी. आर.एफ़.डी.-03 में कमियों को संप्रेषित करने के लिए, दावा दाखिल करने से 15 दिनों तक की निर्धारित अवधि का पालन नहीं किया जिसके परिणामस्वरूप ज्ञापन जारी करने में तीन से 215 दिनों के बीच का विलम्ब हुआ।
रिफन्ड प्रसंस्करण के विभिन्न चरणों की निगरानी के लिए प्रणाली के अभाव में, नौ मामलों में स्वीकृत ₹ 5.97 लाख की राशि का भुगतान दावेदारों को नहीं किया गया, जबकि 33 रिफन्ड मामलों में भुगतान 60 दिनों की निर्धारित समय सीमा के उपरान्त विलम्ब से किया गया, परिणामस्वरूप विभाग ₹ 5.48 लाख के ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी था।
समुचित अधिकारी ने निर्धारित अवधि का पालन नहीं किया और आठ मामलों में औपबंधिक रिफन्ड, अभिस्वीकृति जारी करने की तिथि से सात दिनों की निर्धारित अवधि के उपरान्त सात से लेकर 99 दिनों के बीच के विलम्ब से स्वीकृत किया।
समुचित अधिकारी, विभाग के पास उपलब्ध जी.एस.टी.आर- 3ब में मासिक विवरणी की तिर्यक जाँच करने में विफल रहे, परिणामस्वरूप दावेदार को ₹ 0.15 लाख की रिफन्ड का गलत अनुमत्य हुआ।
झा.व.एवं.से.क. अधिनियम और पूर्व में निरस्त किए गए अधिनियमों के बकाए राशियों को संक्रमिक करने के लिए तंत्र के अभाव में रिफन्ड दावे के दो मामलों से ₹ 0.42 लाख के बकाए को समायोजित नहीं किया गया, परिणामस्वरूप ₹ 0.42 लाख के रिफन्ड का अधिक भुगतान हुआ।

अन्य अवलोकन 
निर्धारण प्राधिकारियों ने कर निर्धारण सम्पन्न करते समय व्यवसायियों द्वारा दी गई सूचना की जाँच नहीं की जिसके फलस्वरूप 39 व्यवसायियों द्वारा ₹ 3,271.08 करोड़ के आवर्त के छुपाए जाने का पता नहीं चला तथा परिणामस्वरूप ₹ 812.99 करोड़ के कर एवं शास्ति का अवनिर्धारण हुआ।
निर्धारण प्राधिकारियों ने बिक्रय छिपाए जाने के कारण नौ व्यवसायियों के आवर्त को बढाया एवं ₹ 43.84 करोड़ का अतिरिक्त कर आरोपित किया परन्तु ₹ 131.51 करोड़ का अर्थदण्ड आरोपित नहीं किया।
14 वाणिज्य कर अंचलों के निर्धारण प्राधिकारियों ने ₹ 2,264.96 करोड़ के छूटों, रियायतों या इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई.टी.सी.) के गलत समायोजन के दावों को अस्वीकृत किया। हालाँकि, अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ₹ 102.24 करोड़ के ब्याज़ का आरोपण नहीं किया गया।
निर्धारण प्राधिकारियों ने 29 व्यवसायियों के मामलों में कर निर्धारण संपन्न करने के दौरान ₹ 85.70 करोड़ के बदले ₹ 109.51 करोड़ के आई.टी.सी. की अनुमति दी। इसके परिणामस्वरूप ₹ 23.81 करोड़ के अधिक आई.टी.सी. का अनुमत्य हुआ।
निर्धारण प्राधिकारियों ने सात व्यवसायियों के मामले में ₹ 2,407.40 करोड़ के बदले ₹ 1,962.03 करोड़ का स.आ./क.दे.आ. निर्धारित किया, परिणामस्वरूप ₹ 445.37 करोड़ के स.आ. का कम निर्धारण हुआ और फलस्वरूप ₹ 22.33 करोड़ के कर का अवनिर्धारण हुआ।
निर्धारण प्राधिकारियों ने कर निर्धारण संपन्न करने के दौरान कर की गलत दरें आरोपित किया जिसके परिणामस्वरूप ₹ 14.53 करोड़ के कर का अल्परोपण हुआ।
निर्धारण प्राधिकारियों ने ₹ 92.59 करोड़ के आवर्त पर पाँच प्रतिशत के.बि.क. और झा.मू.व.क. के अंतर्गत 14 प्रतिशत आरोप्य कर की दरों के बदले दो प्रतिशत की रियायती दर से के.बि.क. आरोपित किया। जिसके परिणामस्वरूप ₹ 10.64 करोड़ के.बि.क. का अवनिर्धारण हुआ।
खनन एवं भूतत्व विभाग
अधिनियम/नियमावली के प्रावधानों के अनुसार स्वामिस्व की दर को सत्यापित करने में विभाग की विफलता के परिणामस्वरूप ₹ 15.42 करोड़ की स्वामिस्व का कम आरोपण हुआ।
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग
विभाग न्यूनतम प्रत्याभूत मात्रा के उठाव को सुनिश्चित करने हेतु कोई कारवाई नहीं किया जिसके परिणामस्वरूप शराब का कम उठाव हुआ और उत्पाद शुल्क ₹ 2.07 करोड़ की हानि के समतुल्य अर्थदण्ड का आरोपण नहीं हुआ।
 

राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम
एसपीएसई का प्रदर्शन

31 मार्च 2020 को झारखण्ड में 31 एसपीएसई (03 निष्क्रिय एसपीएसई सहित) थे। इस भाग में 31 अगस्त 2021 तक नवीनतम अंतिमीकृत लेखाओं के आधार पर तैयार किए गए एसपीएसई के वित्तीय प्रदर्शन को शामिल किया गया है, जो निम्न हैं:
31 अगस्त 2021 तक नवीनतम अंतिमीकृत लेखाओं के अनुसार कार्यशील एसपीएसई ने ₹ 7,739.34 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर दर्ज किया अर्थात् 2018-19 के विरुद्ध 2019-20 में 17.43 प्रतिशत की वृद्धि। यह टर्नओवर वर्ष 2019-20 के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (₹ 3,28,598 करोड़) के 2.36 प्रतिशत के बराबर था। नवीनतम अंतिमीकृत लेखाओं के अनुसार कार्यशील एसपीएसई को ₹ 1,354.20 करोड़ की हानि हुई।
एसपीएसई में कुल निवेश
2019-20 के लेखाओं अथवा एसपीएसई की सूचना के अनुसार 31 मार्च 2020 तक 31 एसपीएसई में ₹ 19,696.52 करोड़ का निवेश (पूँजीगत और दीर्घकालिक ऋण) था। इस कुल निवेश में 23.40 प्रतिशत चुकता पूँजी और 76.60 प्रतिशत दीर्घकालिक ऋण शामिल थे।  
ऊर्जा क्षेत्र के एसपीएसई में निवेश
31 मार्च 2020 तक आठ ऊर्जा क्षेत्र के एसपीएसई में कुल निवेश (अंश-पूँजी एवं दीर्घकालिक ऋण) ₹ 19,281.29 करोड़ था। निवेश में ₹ 4,244.02 करोड़ (22.01 प्रतिशत) अंश-पूँजी और ₹ 15,037.27 करोड़ (77.99 प्रतिशत) दीर्घकालिक ऋण शामिल थे।
2015-16 से 2019-20 की अवधि के दौरान ऊर्जा क्षेत्र के एसपीएसई में कुल निवेश 43.90 प्रतिशत तक बढ़ गयी थी।
झारखण्ड सरकार, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अंश-पूँजी के 92.06 प्रतिशत (₹ 4,244.02 करोड़) और ऋण के 99.67 प्रतिशत (₹  15,037.27 करोड़) का मुख्य हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र में था।
गैर-ऊर्जा क्षेत्र के एसपीएसई में निवेश
31 मार्च 2020 तक, गैर-ऊर्जा क्षेत्र के 23 एसपीएसई में कुल निवेश (अंश-पूँजी और दीर्घकालिक ऋण) ₹  415.23 करोड़ था। निवेश में ₹  365.84 करोड़ (88.11 प्रतिशत) अंश-पूँजी और ₹ 49.39 करोड़ (11.89 प्रतिशत) दीर्घकालिक ऋण शामिल थे।
लेखाओं का प्रस्तुतीकरण
सभी ऊर्जा क्षेत्र के एसपीएसई द्वारा वर्ष 2019-20 की लेखाओं को 30 सितंबर 2020 तक प्रस्तुत करना था। किसी भी सरकारी कंपनी ने 30 सितंबर 2020 या उससे पहले वर्ष 2019-20 की अपनी लेखाओं को सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा के लिए प्रस्तुत नहीं किया। पाँच एसपीएसई ने वर्ष 2019-20 के लिए अपने वित्तीय विवरण 31 अगस्त 2021 तक जमा कर दिए थे। 
01 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2020 की अवधि के दौरान, 23 एसपीएसई में से 11 ने 18 वार्षिक लेखाओं को अंतिम रूप दिया, जिसमें वर्ष 2019-20 के लिए एक लेखे और पिछले वर्षों के 17 लेखाएँ शामिल थीं। इस प्रकार, 21 एसपीएसई के 66 लेखे बकाया थे।
वर्ष 2019-20 के साथ-साथ पूर्ववर्ती वर्षों के लेखाओं को अंतिमीकरण के अभाव में, इस बात का कोई आश्वासन नहीं दिया जा सका कि निवेश एवं व्यय का समुचित लेखाकरण किया गया था और राशि का निवेश जिस उद्देश्य के लिए किया गया था, उसे प्राप्त कर लिया गया।
2.1    "झारखण्ड राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विपणन, बिक्री और माल प्रबंधन" पर लेखापरीक्षा
झारखण्ड राज्य केंदू पत्ता नीति अथवा अन्य विधानों में केंदू पत्ता (केएल) की मात्रा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठूंठ काटने या अन्य उपयुक्त व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं था। हालांकि कंपनी ने केंदु-पत्ता ऋतु 2008 के लिए केंदू झाड़ियों की ठूंठ काटने हेतु निर्देश (फरवरी 2008) जारी किया था परंतु बाद में इसे जारी नहीं रखा जा सका। परिणामस्वरूप, 300 में से 232 (77 प्रतिशत) केएल लॉट की औसत उपज अधिसूचित उपज से कम थी जिसमें 123 ऐसे लॉट शामिल थे जहां वास्तविक उपज 30 से 89 प्रतिशत कम थी।
जुलाई 2021 तक केएल लॉट की अधिसूचित उपज की मात्रा को 36 वर्षों के उपरांत भी पुनराकलन नहीं किया गया। केएल ऋतु-वर्ष 2015 से 2019 के 1499 में से 495 केएल लॉट (33 प्रतिशत), जिसकी अधिसूचित उपज की मात्रा 12.63 लाख मानक बोरियाँ (बोरी) थीं, बिना बिके रह गए। बिना बिके लॉटों का आरक्षित मूल्य ₹ 74.38 करोड़ था।
नमूना-जाँचित चार प्रमंडलों (डाल्टेनगंज, धालभूम, हजारीबाग एवं राँची) में, कंपनी ने केएल ऋतु-वर्ष 2015 से 2019 के दौरान ₹ 17.14 करोड़ की वसूलनीय राशि के विरुद्ध मात्र ₹ 8.57 करोड़ (अतिरिक्त संग्रहित मात्रा का 50 प्रतिशत) की वसूली की। इसके अलावा, ऋतु-वर्ष 2016 से 2019 के दौरान 1.01 लाख बोरी के अधिक संग्रहण के लिए ₹ 5.82 करोड़ की अतिरिक्त संग्रहण लागत प्राथमिक संग्राहकों (पीसी) को मार्च 2021 तक भुगतान नहीं किए गए थे।
केएल ऋतु-वर्ष 2016 से 2019 के दौरान, 8.52 लाख बोरी अधिसूचित उपज वाले 333 लॉट बिना बिके रह गए। विभागीय संग्रहण की सुगमता हेतु विभाग ने कंपनी को ₹ 61.93 करोड़ जारी नहीं किए, जबकि कंपनी द्वारा मांगे गए थे (अप्रैल 2016 एवं फरवरी 2019)। कंपनी ने इन लॉटों के लिए वास्तविक आधार पर निविदा आमंत्रित किए जाने की संभावनाएं भी नहीं तलाश की और इसलिए वे लॉट बिना कटाई किए रह गए और परिणामस्वरूप केएल व्यापार का प्राथमिक उद्देश्य अर्थात् पीसी के लिए आय सृजन, प्राप्त नहीं किया जा सका।  
केएल ऋतु-वर्ष 2016 से 2018 के लिए 149 संग्राहक समितियां (सीसी) को विमुक्त किए गए ₹ 15.58 करोड़ की विकास निधि में से ₹ 15.16 करोड़ मार्च 2020 तक अप्रयुक्त रहे और सीसी के पास पड़े रहे।
39 गोदामों में से, सात गोदाम अच्छी स्थिति में थे, 23 में वृहत् मरम्मती की आवश्यकता थी तथा नौ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थे। राजस्व प्राप्ति का स्रोत होने के बावजूद कंपनी ने गोदामों की मरम्मती या नवीनीकरण की शुरुआत नहीं की, जबकि 2015-18 के दौरान किराया के रूप में ₹ 28.12 लाख की वसूली की गई थी।
वन उत्पादों पर आधारित उद्योगों के विकास के अलावा कंपनी का मुख्य उद्देश्य वन उत्पाद और उत्पादकता में तेजी लाकर परियोजनाओं और गतिविधियों को बढ़ावा देना, विकसित करना और जारी रखना था। कंपनी को लघु वन-उत्पादों (एमएफपी) के व्यावसायिक विक्रय एवं प्रसंस्करण को भी बढ़ावा देना तथा प्रबंधन करना था। कंपनी ने मार्च 2020 तक अपनी गतिविधियों का विस्तार नहीं किया था और अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ वनवासियों के लिए रोजगार सृजन का अवसर को भी जाने दी।
कंपनी ने ₹ 1.25 करोड़ के उपकर तथा टिम्बर बिक्री मूल्य की ₹ 42.14 करोड़ राशि को सरकारी खातों में प्रेषित नहीं किया।

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