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31 मार्च 2023 को समाप्त वर्ष के लिए भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का यह प्रतिवेदन भारत के संविधान के अनुच्छेद 151 के अंतर्गत राज्य की विधान सभा के पटल पर रखे जाने हेतु मध्य प्रदेश के राज्यपाल को प्रस्तुत करने के लिये तैयार किया गया है ।
इस प्रतिवेदन में मध्य प्रदेश शासन के पाँच विभागों यथा नर्मदा घाटी विकास विभाग, खनिज साधन विभाग, जल संसाधन विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग (पंजीकरण और स्टाम्प), वाणिज्यिक कर विभाग (वैट) और ऊर्जा विभाग की अनुपालन लेखापरीक्षा के महत्वपूर्ण परिणाम शामिल हैं। लेखापरीक्षा, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 के अंतर्गत की गई है ।
इस प्रतिवेदन में वे प्रकरण उल्लेखित हैं, जो 2022-23 की अवधि के लिए नमूना लेखापरीक्षा के दौरान जानकारी में आए, साथ ही वे भी जो पहले के वर्षों में जानकारी में आए थे, लेकिन पिछली लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में प्रतिवेदित नहीं किए जा सके जहाँ आवश्यक था, 2022-23 के बाद की अवधि से संबंधित प्रकरणों को भी शामिल किया गया ।
लेखापरीक्षा, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा जारी लेखापरीक्षा मानकों के अनुरूप की गई है ।
यह अनुवादित संस्करण है । इस अनुवादित संस्करण में अंग्रेजी संस्करण से कोई भिन्नता पाए जाने पर, अंग्रेजी संस्करण में उद्धृत तथ्य मान्य होंगे ।