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दिल्ली में शराब के विनियमन और आपूर्ति पर निष्पादन लेखापरीक्षा (वर्ष 2024 का प्रतिवेदन सं.1)
इस प्रतिवेदन में “दिल्ली में शराब के विनियमन और आपूर्ति” पर की गई निष्पादन लेखापरीक्षा के परिणाम समाविष्ट हैं। इस लेखापरीक्षा में 2017-18 से 2021-22 तक चार वर्षों की अवधि शामिल थी और यह लेखापरीक्षा दिल्ली में भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) और विदेशी शराब के विनियमन और आपूर्ति की जांच करने हेतु की गई थी। 2017-21 की अवधि से संबंधित लेखापरीक्षा निष्कर्षों में लाइसेंस देने में नियमों का उल्लंघन, आईएमएफएल के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता का अभाव, शराब का अपर्याप्त गुणवत्ता नियंत्रण, समय पर राजस्व रिसाव की पहचान करने और उसे रोकने, शराब की तस्करी के विरुद्ध कार्य करने के लिए कमज़ोर नियामक कार्यप्रणाली, दिल्ली आबकारी अधिनियम/नियमावली के उल्लंघनों के मामलों में साक्ष्य संग्रहण और पुष्टि में कड़ाई का अभाव आदि शामिल थे। यह प्रतिवेदन नई आबकारी नीति (2021-22) की कमियों को भी उजागर करता है जैसे नई आबकारी नीति बनाने हेतु बदलावों का सुझाव देने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की उपेक्षा करना यथा, राज्य के स्वामित्व वाली थोक बिक्री इकाई के बजाय निजी संस्थाओं को थोक लाइसेंस देना, प्रति बोतल लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के स्थान पर लाइसेंस में उत्पाद शुल्क की अग्रिम वसूली और एक व्यक्ति को अधिकतम दो दुकानें आबंटित करने के बजाय आवेदक को अधिकतम 54 खुदरा दुकानें प्राप्त करने की अनुमति दिया जाना, लाइसेंस का डिजाइन और वितरण और इस नीति का कार्यान्वयन आदि।