मेन्यू

ऑडिट रिपोर्ट

अनुपालन
Haryana

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा (हरियाणा सरकार 2026 की प्रतिवेदन संख्या 3)

दिनांक जिस पर रिपोर्ट की गई है:
सरकार के प्रकार
राज्य
क्षेत्र IT Audit

अवलोकन

इस प्रतिवेदन में ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना और आबकारी विभाग में लाइसेंस प्रबंधन, शराब उत्पादन एवं वितरण प्रणाली की सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा शामिल है।

अध्‍याय 1: ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना की सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साथ करार को निष्पादित न करने, परियोजना निगरानी इकाई (पी.एम.यू.) के अप्रभावी कामकाज, महत्वपूर्ण कार्यों/मॉड्यूल की अनुपस्थिति, अपर्याप्त निगरानी और उपयोगकर्ताओं को अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण प्रणाली का कार्यान्वयन दोषपूर्ण था, क्योंकि कुछ गतिविधियां या तो नहीं की गई या ऑफलाइन की गई, जिससे ई-प्रोक्योरमेंट के उद्देश्य विफल हो गए।

निविदा प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण पाई गई क्योंकि बोली का अपर्याप्त प्रचार-प्रसार, बोली प्रस्तुत करने के लिए अपर्याप्त समय देना, निविदा-सह-नीलामी कार्यक्षमता का उपयोग न करना, पुन:आमंत्रित एवं मूल निविदाओं के बीच संबंध का अभाव तथा निविदा प्रक्रिया के लिए डुप्लिकेट उपयोगकर्ताओं के नामांकन जैसे मामले पाए गए। प्रणाली में अनियमित प्रथाओं को रोकने के लिए नियंत्रणों का भी अभाव था, जैसे कम अवधि के लिए निविदाओं का विस्तार, विभिन्न तारीखों पर बोलियों को डिक्रिप्ट करना और बोलियों का क्रम से हटकर खोला जाना।

फीस एवं बयाना राशि के संबंध में वित्तीय नियमों का अनुपालन नहीं किया गया क्योंकि राशियों को सही रूप से अंतरित/समायोजित नहीं किया गया था, गलत तरीके से वापस किया गया था या वापस नहीं किया गया/फीस की कम या अधिक वसूली, समाधान न करना और सरकार को वस्तु एवं सेवा कर नहीं लगाने/प्रेषित नहीं करने के संबंध में भी मामले देखे गए।

अध्‍याय 2: आबकारी विभाग में लाइसेंस प्रबंधन, शराब उत्पादन एवं वितरण प्रणाली की सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा

₹ 104.86 करोड़ की लागत से क्रियान्वित हरियाणा ई-वाणिज्यिक कर प्रणाली सेवा संबंधी कमियों से ग्रस्त थी, जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्षमताओं का प्रावधान न होना, सरकार के वित्तीय हितों को सुरक्षा देने हेतु अपर्याप्त नियंत्रण और गलत रिपोर्टिंग/डायवर्जन आदि के जोखिमों को रोकने के लिए त्रुटिपूर्ण रिपोर्टिंग। यह प्रणाली राज्य की आबकारी नीतियों और सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली की आवश्यकताओं द्वारा परिभाषित पारदर्शिता, दक्षता और उत्‍तरदायित्‍व के स्थापित उद्देश्यों के साथ पूरी तरह से संरेखित नहीं थी। लाइसेंस प्रदान करने से पहले विभागीय प्राधिकारियों द्वारा समीक्षा के लिए ब्लैक लिस्ट किए गए शराब लाइसेंसधारकों का संग्रह बनाने की सुविधा भी उपलब्‍ध नहीं थी। शराब की दुकानों की जियो-टैगिंग के अभाव में, आबकारी नीतियों में निहित प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने की क्षमता कम हो जाती है। प्रणाली में आबकारी शुल्‍कों की गलत गणना जैसे बोतलबंदी फीस, निर्यात शुल्क, अतिरिक्त आबकारी शुल्क आदि के कमजोर अनुपयोग नियंत्रणों के कारण होती है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के राजकोष को वित्तीय हानि हुई। प्रणाली में स्वीकृत समूह-वार शराब स्टॉक के साथ होलोग्राम श्रृंखला की मैपिंग करने की कार्यक्षमता का अभाव था। प्रणाली की विफलताओं या सुरक्षा उल्लंघनों के मामले में विभाग के पास व्यवसाय निरंतरता/आपदा वसूली योजनाएं नहीं थी।

ऑडिट रिपोर्ट डाउनलोड करें