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Haryana

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन वस्तु एवं सेवा कर पर अनुपालन लेखापरीक्षा (हरियाणा सरकार 2026 की प्रतिवेदन संख्या 2)

दिनांक जिस पर रिपोर्ट की गई है:
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अवलोकन

वस्‍तु एवं सेवा कर पर अनुपालन लेखापरीक्षा - हरियाणा सरकार - वर्ष 2026 की प्रतिवेदन संख्‍या 2 पर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन

इस प्रतिवेदन में वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत ई-वे बिल प्रणाली पर विषय विशिष्ट अनुपालन लेखापरीक्षा और वस्‍तु एवं सेवा कर के भुगतान और रिटर्न फाइल करने में विभाग की निगरानी - चरण II पर विषय विशिष्ट अनुपालन लेखापरीक्षा (एस.एस.सी.ए.) सम्मिलित है, जिसमें ₹ 822.99 करोड़ का वित्तीय निहितार्थ शामिल है।

अध्‍याय 1: वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत ई-वे बिल प्रणाली

पांच उप आबकारी एवं कराधान आयुक्तों के अंतर्गत, जीएसटी पंजीकरण निरस्त होने की प्रभावी तिथि के बाद ₹ 13.49 करोड़ के निर्धारणीय मूल्य वाले 41 ई-वे बिल सृजित किए गए थे। चार करदाताओं ने एक ही इनवॉइस पर अनेक ई-वे बिल सृजित किए थे। पांच उप-आबकारी एवं कराधान आयुक्‍तों के अंतर्गत आने वाले 10 करदाताओं से संबंधित 12 ई-वे बिल लेनदेन, जिनका निर्धारणीय मूल्य ₹ 2.78 करोड़ था, जोखिमपूर्ण वाहनों अर्थात गुम हुए वाहनों, स्‍क्रैप, अभ्‍यर्पण, निरस्‍त और निलंबित वाहनों, दुपहिया वाहनों आदि का उपयोग करके निष्‍पादित हुए थे। यह भी पाया गया कि संबंधित जावक आपूर्ति को वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-I रिटर्न में प्रस्‍तुत नहीं किया गया था। 12 करदाताओं द्वारा ₹ 36.30 करोड़ के कर योग्य मूल्य वाले 68 ई-वे बिल जनरेट किए गए थे, जो पंजीकरण के छ: माह के भीतर बनाए गए उच्च मूल्य वाले ई-वे बिल, पिन कोड से पिन कोड तक अत्‍यधिक दूरी वाले ई-वे बिल, कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय के डिफॉल्टरों से संबंधित ई-वे बिल, विदेश व्यापार महानिदेशालय की ब्‍लैक ‍लिस्‍ट में डाली गई संस्थाओं के ई-वे बिल, विश्लेषण एवं जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय द्वारा अपराधों के लिए बुक किए गए पक्ष और अमान्य पिन-कोड का उपयोग करके जनरेट किए गए ई-वे बिल में शामिल थे।

अध्‍याय 2: वस्‍तु एवं सेवा कर के भुगतान और रिटर्न फाइल करने में विभाग की निगरानी - चरण II पर विषय विशिष्ट अनुपालन लेखापरीक्षा

विभाग ने वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-3ए में उन 6,064 करदाताओं के संबंध में नोटिस जारी नहीं किया, जिन्होंने 2017-18 से 2019-20 की अवधि के दौरान सात महीने या उससे अधिक समय तक वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-3बी फाइल नहीं की थी। विभाग ने कर के विलंबित भुगतान पर दो मामलों में ₹ 3.17 करोड़ का कम ब्याज उद्ग्रहित किया। लेखापरीक्षा द्वारा पहचाने गए उच्च मूल्य डेटा विसंगतियों के 687 मामलों में से विभाग ने केवल 339 मामलों का उत्‍तर दिया। इनमें से 196 मामले 57.81 प्रतिशत अनुपालन के पाए गए, जिनमें ₹ 738.34 करोड़ की अनुपालन विसंगतियां शामिल थी। स्रोत पर कर कटौती (टी.डी.एस.)/स्रोत पर कर संग्रह (टी.सी.एस.) के अंतर्गत कर का कम भुगतान, अदत्त कर देयता और इनपुट टैक्‍स क्रेडिट बेमेल जैसे जोखिम मानकों में विचलन की अपेक्षाकृत उच्च दरें पाई गई। 339 मामलों में से, विभाग ने 123 मामलों में कार्रवाई आरंभ की जिनमें से 17 मामलों में ₹ 3.49 करोड़ की वसूली की गई, 101 मामलों में ₹ 582.07 करोड़ के नोटिस जारी किए गए, और पांच मामलों में ₹ 4.60 करोड़ की विसंगतियों के बारे में करदाताओं को सूचित किया गया। 19 करदाताओं ने एक से 293 दिनों की देरी से मासिक रिटर्न वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-3बी फाइल की थी और ₹ 1.64 करोड़ की ब्याज देयता का भुगतान नहीं किया था। विभाग ने वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-1 और वस्‍तु एवं सेवा कर रिटर्न-3बी के बीच कर देयता के बेमेल के 87 मामलों के संबंध में अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए थे, जिनमें ₹ 356.76 करोड़ की राशि शामिल थी।

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