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31 मार्च 2018 को समाप्त वर्ष के लिए सामाजिक, सामान्य और आर्थिक क्षेत्रों (गैर-सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) पर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन
इस प्रतिवेदन में ₹ 264.29 करोड़ के वित्तीय आशय के एक निष्पादन लेखापरीक्षा और 10 पैराग्राफ शामिल है।
‘अनाधिकृत कॉलोनियों में पेजयल आपूर्ति और सीवरेज सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना’ पर निष्पादन लेखापरीक्षा में सहायता अनुदान का अपवर्तन, सभी अनाधिकृत कॉलोनियों में पाइप द्वारा जलापूर्ति के लिए रणनीतिक योजना का अभाव, पानी और सीवर लाइन बिछाने वाले मंडलों के बीच समन्वय की कमियां, प्राक्कलनों की तैयारी एवं अनुमोदन में कमियां तथा कार्यों के आवंटन और निष्पादन में देरी आदि का पता चला।
मसौदा पैरा अधिक सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर अधिक व्यय, आयकर और उस पर ब्याज के परिहार्य भुगतान, ब्याज का परिहार्य भुगतान आदि से संबंधित है जो ‘शहरी गरीबों के लिये बुनियादी सेवाओं के तहत शहरी गरीबों के लिए किफायती आवास परियोजनाएं – जेएनएनयूआरएम’ पर एक विस्तृत पैरा के अतिरिक्त है, जिसमें शहरी गरीबों को आवास प्रदान करने में विभिन्न कमियों जैसे कि उचित योजनाओं की कमी, परियोजनाएं अधूरी पड़ी रहना, पूर्ण आवासीय इकाइयां अप्रयुक्त रहने के कारण लाभार्थियों आदि की पहचान में देरी आदि का पता चला।