परिचय

मुख्यालय (SMU) की अधिसूचना संख्या 221/42-SMU/2025 दिनांक 13 जून 2025 के अनुसार, राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (State Public Sector Enterprises - SPSEs) के पुनर्गठन एवं उन्हें नामित ऑडिट प्रबंधन समूहों के अंतर्गत समूहीकृत (Clustering) किए जाने के फलस्वरूप, प्रधान महालेखाकार (लेखापरीक्षा), हिमाचल प्रदेश के कार्यालय में वाणिज्यिक शाखा (Commercial Wing), ऑडिट प्रबंधन समूह-III (AMG-III) के अंतर्गत कार्य करती है। इस समूह का नेतृत्व सुश्री राजवंत कौर, भारतीय लेखा एवं लेखापरीक्षा सेवा (IA&AS), बैच-2021 द्वारा किया जाता है।

वाणिज्यिक शाखा अपने लेखापरीक्षा अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विद्युत (Power) एवं गैर-विद्युत (Non-Power) क्षेत्रों के राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (SPSEs), सांविधिक निगमों (Statutory Corporations) तथा स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) की अनुपालन लेखापरीक्षा (Compliance Audit), निष्पादन लेखापरीक्षा (Performance Audit), विषय-विशिष्ट अनुपालन लेखापरीक्षा (Subject-Specific Compliance Audit – SSCA) तथा वित्तीय लेखापरीक्षा (Financial Audit) करने के लिए उत्तरदायी है।

सरकारी कंपनियों के खातों की लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 19, कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 619, तथा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139 एवं 143 के प्रावधानों के अनुसार की जाती है। सांविधिक निगमों की लेखापरीक्षा उनके संबंधित अधिनियमों के अंतर्गत की जाती है। 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार राज्य सरकार के 32 सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSUs) हैं, जिनमें 27 कार्यरत (Working), 3 गैर-कार्यरत (Non-Working) तथा 2 सांविधिक निगम (Statutory Corporations) शामिल हैं।

सरकारी कंपनियों अथवा निगमों के खातों से संबंधित प्रतिवेदन नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 19-ए के अंतर्गत राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाते हैं, ताकि उन्हें हिमाचल प्रदेश राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जा सके।

हिमाचल पथ परिवहन निगम (Himachal Road Transport Corporation), जो एक सांविधिक निगम है, के मामले में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ही एकमात्र लेखापरीक्षक (Sole Auditor) हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश वित्तीय निगम (Himachal Pradesh Financial Corporation) के संबंध में, निगम द्वारा नियुक्त चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा की गई लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को भी खातों की लेखापरीक्षा करने का अधिकार प्राप्त है। इन दोनों निगमों के वार्षिक खातों पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन (Separate Audit Reports) अलग से राज्य सरकार को भेजे जाते हैं।

यह लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा जारी लेखापरीक्षा मानकों (Auditing Standards) के अनुरूप संपादित की जाती है।

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