सीएजी के डीपीसी अधिनियम, 1997 में संशोधन



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सीएजी के डीपीसी अधिनियम, 1997 में संशोधन

संशोधन I – 1976 का सं. 45एफ
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यो, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यो, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 10
  • मुख्य् अधिनियम की धारा 11
  • मुख्य् अधिनियम की धारा 22
संशोधन II – 1984 का सं. 2
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यो, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1984
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यो, शक्तितयां एवं [ 1987 का 50] सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1987
  • मुख्यर अधिनियम की धारा 7 को हटाया जाए
  • मुख्यर अधिनियम की धारा 9 में
संशोधन III – 1987 का सं. 50
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्या, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1987
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्या, शक्तितयां एवं [ 1987 का 50] सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1987
  • मुख्यर अधिनियम की धारा 7 को हटाया जाए
  • मुख्यर अधिनियम की धारा 9 में
संशोधन IV – 1994 का सं. 51
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यस, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1994
  • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्यस, शक्तितयां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971
  • उप-धारा (6सी) के पश्चा‍त मुख्यक अधिनियम की धारा 6 में

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य9, शक्तिययां और सेवा की शर्तें अधिनियम 1971 में चार बार अर्थात् 1976, 1984, 1987 और 1994 में संशोधन किया गया है। संशोधनों की सूची नीचे दी गई है:

I. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के
(कर्तव्यं, शक्तिरयां एवं सेवा की शर्तें)
संशोधन अधिनियम, 1976 का सं. 45-एफ

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्यक, शक्तिकयां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 में संशोधन के लिए एक अतिरिक्तं अधिनियम।

भारत के गणराज्यअ के सत्ता7ईसवें वर्ष में संसद द्वारा अधिनियम निम्नाीनुसार है:-

    1. इस अधिनियम को नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का (कर्तव्य , शक्ति यों एवं सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1976 कहा जा सकता है।
    2. इसे मार्च 1976 के प्रथम दिवस से लागू माना जाएगा।
  1. 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्यम, शक्तिायां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम 1971 (जिसे यहां बाद में मुख्य् अधिनियम कहा गया) की धारा 10 में, उप-धारा (1) में (क) पहले परन्तुोक के लिए निम्नेलिखित परन्तुनकों को इनसे बदला जाए। बशर्तें राष्ट्रापति आदेश द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श के बाद उन्हेंो संकलन की जिम्मेादारी से मुक्ता कर सकता है।

    (i) संघ के कथित लेखे (या तो एक बार या क्रमवार कई आदेश जारी कर के); या

    (ii) किसी विशेष सेवा या संघ के विभागों के लेखें: आगे प्रावधान किया जाता है कि एक राज्य का राज्यकपाल राष्ट्र पति के पूर्व अनुमोदन से तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के साथ परामर्श के बाद आदेश के द्वारा उसे निम्न‍लिखित के संकलन के उत्ततरदायित्वक से मुक्तक कर सकता है।

    (i) राज्यक के कथित लेखे (या तो कुछ आदेशों को एक बार अथवा, क्रमवार जारी करके); अथवा

    (ii) राज्यग की किन्हीब विशिष्ट सेवाओं अथवा विभागों के लेखें; (ख) दूसरे परन्तुचक में ‘’आगे प्रावधान किया गया है’’ शब्दों के लिए ‘’ भी प्रावधान किया गया’’ शब्द) बदला जाना चाहिए।
  2. मुख्या अधिनियम की धारा 11 में
     
    1. ‘’इसकी ओर से किसी और उत्त रदायी व्यथक्तिर द्वारा’’ शब्दोंज के लिए, ‘’राज्यपाल द्वारा या उसकी ओर से उत्तकरदायी कोई और व्यकक्तिय’’ द्वारा शब्दक को बदला जाना चाहिए।
    2. 2. निम्न लिखित परन्तुतकों को अंत में शामिल किया जाना चाहिए, नामत:प्रावधान किया जाता है कि राष्ट्र पति, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के साथ परामर्श के बाद, उन्हेंन आदेश द्वारा संघ या केंद्र शासित प्रदेश जिसकी विधान सभा है के वार्षिक प्राप्ति्यों और वितरणों से संबंधित लेखाओं को तैयार और प्रस्तुेत करने के उत्तकरदायित्वत से मुक्ति कर सकता है: आगे प्रावधान किया जाता है कि एक राज्यु का राज्य पाल, राष्ट्रकपति के पूर्व अनुमोदन के साथ और नियंत्रक महालेखापरीक्षक के साथ परामर्श के बाद, उसे आदेश द्वारा राज्य् के वार्षिक प्राप्ति्यों और वितरणों से संबंधित लेखों की तैयारी और प्रस्तुेत करने के उत्तयरदायित्वे से मुक्त् कर सकता हैं।
  3. 4. मुख्य धारा के खंड 22 में
     
    1. उप धारा (2) के खण्डी (ख) में ‘’लेखाओं के’’ शब्दोंं के बाद ‘’संघ या किसी राज्य’ के या के’’ शब्द शामिल किया जाएगा:
    2. उप-धारा (3) में ‘’दो कमिक सत्रों में’’ शब्दोंु के लिए, ‘’दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में’’ शब्द. और शब्द और ‘’सत्र जिनमे इसे प्रस्तु त किया गया या इसके तुरन्तस बाद के सत्र में’’ शब्दोंत को ‘’सत्र के तुरन्तं बाद के सत्र या उक्तु क्रमिक सत्र’’ शब्दों से बदला जाए।
    1. भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के (कर्तव्य्, शक्तिसयां तथा सेवा की शर्तें) संशोधन अध्यांदेश, 1976 को इसके द्वारा निरस्तर कर दिया गया है।
    2. 2. ऐसे निरसन के बावजूद भी मुख्य अधिनियम के अन्तलर्गत कुछ भी किया गया या कोई कार्यवाही की गई, जैसा कि कथित अध्यानदेश द्वारा यथा संशोधित हो, इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित मुख्य अधिनियम के अन्त्र्गत किया गया या लिया गया माना जाएगा।

II. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के
(कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें)
संशोधित अधिनियम, 1984
1984 की सं. 2
(16 मार्च, 1984)

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम, 1971 को संशोधित करने के लिये इसके अतिरिक्त अधिनियम किया:-

भारत गणतंत्र के पैंतीसवें वर्ष में इसका संसद द्वारा निम्न प्रकार से अधिनियमित किया:

  1. इस अधिनियम का नाम नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1984 कहा जाएं।
  2. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम 1971 (यहां मुख्य अधिनियम के रूप में संदर्भित) में धारा 6 में, उप-धारा (6) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा सम्मिलित होगी अर्थात:-

    (6क) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) में निर्दिष्टन ऐसा कोई व्यक्ति, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1984 के प्रारंभ के पश्चापत् नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के रूप में पद (चाहे उपधारा (8) में विनिर्दिष्टग किसी रीति से या त्यागपत्र द्वारा) छोड़ता है, इस प्रकार छोड़ने पर निम्नलिखित के हकदार होंगे:-

    1. उस पेंशन का हकदार होगा जिसका वह उस सेवा के नियमों के अधीन, जिसमें वह था, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के रूप में अपनी सेवा की ऐसी सेवा में पेंशन के लिये गिनी जाने वाली निरंतर अनुमोदित सेवा के रूप में संगणना करके हकदार हुआ होता; और
    2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक रूप में सेवा के प्रत्येक पूरे वर्ष के बाबत सात सौ रूपये प्रति वर्ष की विशेष पेंशन का हकदार होगा; बशर्ते कि इस उप-धारा के खण्डे (क) और खण्डक (ख) के अंतर्गत उसे देय राशि का कुल किसी भी हालत में प्रतिवर्ष बीस हजार और चार सौ रूपये की राशि से अधिक नहीं होगा।
  1. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें [1987 की 50]) संशोधन अधिनियिम, 1987 इस प्रकार पद छोड़ने पर वह निम्नलिखित के हकदार होंगे-

    1. पेंशन जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को देय पेंशन के बराबर होगी- (i) यदि ऐसे व्यक्ति उप-धारा (1) या उपधारा (3) में निर्दिष्टा व्यक्ति है तो, समय-समय पर यथा संशोधित उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1958 (जिसे इसमें इसके पश्चाित् उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम उल्लेखित) की अनुसूची के भाग III के प्रावधानों के अनुसार; और (ii) यदि ऐसा व्यक्ति उपधारा (4) में निर्दिष्टश व्यक्ति है तो, समय-समय पर यथा संशोधित, उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम की अनुसूची के भाग I के प्रावधानों के अनुसार;
    2. 2. ऐसी पेंशन (पेंशन का रूपान्तरित सहित), परिवार पेंशन और उपदान का, जो समय-समय पर यथा संशोधित, उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अनुज्ञेय है, हकदार होगा।
  2. मुख्यन अधिनियम की धारा 7 हटानी होगी।
  3. 4. मुख्यन अधिनियम की धारा 9 में प्रारंभिक पैराग्राफ के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित होगा, नामत:-

    "इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, यात्रा भत्ता, किराया मुक्त मकान की सुविधा और ऐसे किराया मुक्त मकान के मूल्य पर आय कर के अदायगी से छूट यातायात सुविधाएँ, सत्कार भत्ता और चिकित्सा सुविधा से संबंधित सेवा की शर्तें तथा सेवा की ऐसी अन्य शर्ते जो उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम के अध्याबय 4 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को तत्समय लागू है जहां तक हो सके, किसी सेवारत या नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को लागू होंगी, जैसा मामला हों।"

III. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के
(कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें)
अधिनियम, 1987
1987 की सं. 50
(16 दिसम्बर, 1987)

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम, 1971 को संशोधित करने के लिये इसके अतिरिक्त अधिनियम भारत गणतंत्र के अडतीसवें वर्ष में इसका संसद द्वारा निम्न प्रकार से अधिनियमित किया:-

  1. इस अधिनियम का नाम नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1984 कहा जाए।
  2. 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम 1971 (यहां मुख्यम अधिनियम के रूप में संदर्भित) में धारा 6 में,-
    • उप-धारा (6क) और (6ख) में, प्रावधानों को हटाना होगा और 1 जनवरी, 1986 से हटा हुआ माना जायेगा;
    • उप-धारा (6ख) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा को शामिल किया जाएगा, नामत:- (6ग) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) में निर्दिष्टक ऐसा कोई व्यक्ति, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1984 के प्रारंभ के पश्चा त् नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के रूप में पद (चाहे उपधारा (8) में विनिर्दिष्टक किसी रीति से या त्यागपत्र द्वारा) छोड़ता है।
    • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें [1987 की 50]) संशोधन अधिनियिम, 1987 इस प्रकार पद छोड़ने पर वह निम्नांकित के हकदार होंगे-

      क) पेंशन जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को देय पेंशन के बराबर होगी-
      (i) यदि ऐसे व्यक्ति उप-धारा (1) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट व्यक्ति है तो, समय-समय पर यथा संशोधित उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1958 (जिसे इसमें इसके पश्चातत् उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम उल्लेखित) की अनुसूची के भाग III के प्रावधानों के अनुसार; और

      (ii) यदि ऐसा व्यक्ति उपधारा (4) में निर्दिष्टम व्यक्ति है तो, समय-समय पर यथा संशोधित, उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम की अनुसूची के भाग I के प्रावधानों के अनुसार;

      (ख) ऐसी पेंशन (पेंशन का रूपान्तरित सहित), परिवार पेंशन और उपदान का, जो समय-समय पर यथा संशोधित, उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अनुज्ञेय है, हकदार होगा;
  3. मुख्यं अधिनियम की धारा 7 हटानी होगी।
  4. मुख्यं अधिनियम की धारा 9 में प्रारंभिक पैराग्राफ के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित होगा, नामत:-
    "इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, यात्रा भत्ता, किराया मुक्त मकान की सुविधा और ऐसे किराया मुक्त मकान के मूल्य पर आय कर के अदायगी से छूट यातायात सुविधाएँ, सत्कार भत्ता और चिकित्सा सुविधा से संबंधित सेवा की शर्तें तथा सेवा की ऐसी अन्य शर्ते जो उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम के अध्याशय 4 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को तत्समय लागू है जहां तक हो सके, किसी सेवारत या नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को लागू होंगी, जैसा मामला हो।"

IV. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के
(कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें)
अधिनियम, 1994
1994 की सं. 51
(26 अगस्त, 1994)

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम, 1971 को संशोधित करने के लिये इसके अतिरिक्त अधिनियम भारत गणतंत्र के पैंतालीसवें वर्ष में इसका संसद द्वारा निम्न प्रकार से अधिनियमित किया:-

  1. (1) इस अधिनियम का नाम नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्त्तव्य, शक्तियां तथा सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1984 कहा जाएं।

    (2) इस अधिनियम की धारा 2 को 27 मार्च, 1990 से लागू माना जाएगा और उसकी धारा 3, 16 दिसम्बर, 1987 से लागू मानी जाएगी।
  2. 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्त्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 (इसके पश्चाबत् मुख्य8 अधिनियम के रूप में संदर्भित) धारा 3 में, परंतुक में-

    (i) खण्डा (ख) में, अंत में आने वाले शब्द ‘और’ को हटाना होगा;
    (ii) खण्डा (ग) को हटाना होगा।
  3. 3. उप-धारा (6ग) के बाद, मुख्य अधिनियम की धारा 6 में, निम्नलिखित उप-धाराओं को इस प्रकार प्रतिस्थापित किया जाएगा नामत:-

    (6D) (6घ) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, जिसने 16 दिसम्बर 1987 से पहले किसी समय नियंत्रक-महालेखापरीक्षक पद (चाहे उपधारा (8) में निर्दिष्टि किसी रीति से या त्यागपत्र द्वारा) छोड़ा है, उस तिथि को और उस तिथि से उप-धारा 6(ग) में विनिर्दिष्टे पेंशन का हकदार होगा।
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